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| पानी ही पानी |
मशहूर दोहा है की
हर जगह सिर्फ पानी ही पानी। और इतना पानी होने के बाद भी पीने के पानी लोग। सच है
आमीन
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| पानी ही पानी |
इस बड़ते तापमान का ही नतीजा है की ध्रुवो पर बर्फ पिघल रहा है अगर यही हाल रहा तो डर है की किनारों पर स्तिथ देश जल्दी ही सागर में समा जायेंगे। ग्लोबल वार्मिंग ने जानवरों के साम्राज्य को भी प्रवाभित करना प्रारंभ कर दिया है कई प्रजातीय जो इस बदलते मौसम की मार सह सकने में अक्षम है लुप्त होती जा रही है। इस ग्लोबल वार्मिंग का ही प्रणाम हमे मौसम चक्र के बिगड़े रूप में नज़र आ रहा है अब गर्मिया सर्दियों से अधिक लम्बी होती है ।बारिश का कोई समय पक्का नहीं है। बारिश में सूखा पड़ता है और सर्दी या गरमी के मौसम में बारिश तबाही मचा देती है। बड़ते तापमा ने कई नई बीमारियों को भी जन्म दे दिया है। इसका कारण यह है की बेक्टेरिया सर्दी की अपेक्षा गर्मी में तीव्रता से बड़ते है । आज किसान हमेशा डरे रहते है की पता नहीं कब इस बदलते मौसम की मार से उनकी फसल बर्बाद हो जाए। इस तरह कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं है जो इस ग्लोबल वार्मिंग से परेशान न हो । पर अब सोचने और बाते करने या चिंता जताने से काम नहीं चलेगा क्यूँकी अगर वक़्त रहते इस समस्या को सम्भाला नहीं गया तो एक क़यामत आने से कोई नहीं रोक पायेगा और उस क़यामत के ज़िम्मेदार हम स्वयं ही होंगे ।कभी कभी मैसोचती हूँ की मेने कभी अपनी मर्ज़ी से कोई डिसीज़न नहीं लिया हमेशा कोई न कोई मुझे रोक देता है कभी तो खुद ही हिम्मत नहीं पड़ती पता नहीं शायद यही ज़िन्दगी है हम अपने लिए नहीं दूसरो के लिए जीते है पर हम को क्या अपनी ज़िन्दगी पर कोई हक नहीं होना चाहिए यहाँ तक की ज़िन्दगी का सबसे ख़ास फैसला भी घरवालो की मर्ज़ी से ही लेते है पर क्या हमको ये जानने का हक नहीं होना चाहिए की हमको जिस इंसान के साथ ज़िन्दगी गुजारनी हे वो क्या इस लायक है या नहीं क्या वो हमे समझ पायेगा शायद यही ज़िन्दगी है हर मोड़ पर एक नया इम्तिहान होता है हर मोड़ पर नई मंजिल होती है हमको बस चलते जाना होता है बाक़ी सब खुदा पर छोड़ देना चाहिए वो जो भी फैसला लेगा उसमे ज़रूर उसकी मर्जी होगी बस हर हाल में जीने की आदत होना चाहिए और खुद पर यकीन यही ज़िन्दगी जीने का सही रास्ता है ।