गुरुवार, 5 जून 2008

ज़िंदगी भी अजीब हे

कई बार हम ज़िंदगी मी ऐसे लोगो से मिलता हे जो हमारे अपने न होकर भी अपनों से प्यारे होते हे। खास्तोर पर हमारे दोस्त जो मिलते हे टू ज़िंदगी बन जाते हे और जब जुदा होते हे तो ज़िंदगी को वीरान कर जाते हे । पर यही ज़िंदगी हे हम जिसको कभी अपने से दूर करना नही चाहते वो अक्सर हमे बीच राह मी छोड़ कर चले जाते हे। और बस उनकी यादे ही रह जाती हे । आज मेरे सरे डॉस मुझसे दूर हे पर उनकी यादे नेरी ज़िंदगी का वो हिस्सा हे जो मुझसे कभी जुदा नही होगा। अपने दोस्तो के साथ बिताया हुआ एक एक पल मेरे लिए बहुत कीमती हे । कोई भी किसी भी कीमत पे इनको मुझसे जुदा नही कर सकता। वो घंटो एक दुसरे से बात करना सारी परेशानिया एक दुसरे को बताना छोटी छोटी बातो पर लड़ना घुस्सा होना और फ़िर मान जाना । मिलकर पढाई करना और ये भी सोचना की इससे ज़्यादा नम्बर कैसे आए । पर एक दुसरे की खुशी मी खुश होना कभी बे वजह रोना तो कभी बे मतलब घंटो हँसते रहना। साथ मी फ़िल्म देखना घूमना सब अब सिर्फ़ यादो मी ही रह गया हे । जगजीत जी ने कितना ठीक कहा हे ये दोलत भी ले लो या शोहरत भी ले लो भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी मगर मुझे लोटा दो वो बचपन । पर बीता वक्त लौट कर नही आता बस यादे दे जाता हे उन्ही यादो को मे सजा कर रखना चाहती हूँ इसलिए यह मेरी एक छोटी सी कोशिश हे।
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