बुधवार, 4 जून 2008

पहली दोस्ती

हलकी हलकी बारिश हो रही थी मेरे पापा मेरा हाथ पकड़कर मुझे विद्यालय ले जा रहे थे और मै रो रही थी मुझे विद्यालय जन पसंद नही था इसलिए खूब आंसू बहाए पर पापा नही माने और मुझे आख़िर जाना ही पड़ा। कक्षा के बाहर खड़े होकर मेने अन्दर जाने से मना कर दिया टैब पापा को गुस्सा आ गया वो मेरे को डांटने लगे तभी हमारे सर बाहर आ गए और मुझे रोता देखकर एक लड़की को बुलाया और कहा की इस बच्ची को अन्दर ले चलो वो लड़की मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अन्दर ले गई और बोलीं आज से हम दोस्त हे वो मेरी सबसे पहली दोस्त थी और सबसे प्यारी भी जिससे मेरी दोस्ती आज भी कायम हे उसका नाम स्मिता हे । और वो हमारी मुलाक़ात का पहला दिन जो हम सारी ज़िंदगी नही भूल सकते। उसके बाद न जाने कितने दोस्त आए और गए पर वो दोस्ती वो अपनापन मै कभी नही भूल सकती। ज़िंदगी भर उस दिन को अपनी यादो मै रखूंगी।

बस अब अगली बार

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